Category: Low Immunity

Diet and Nutrition Tips to Promote Women Health(महिलाओं के स्वास्थ्य को बढ़ावा देने वाले प्राकृतिक उपाय)

आयुर्वेद के अनुसार

आयुर्वेद के अनुसार किसी भी उम्र में सबसे अच्छा दिखने और महसूस करने के लिए एक स्वस्थ शरीर और स्वस्थ दिनचर्या का होना बहुत जरूरी है।आयुर्वेदिक चिकित्सा के अनुसार महिलाएं पुरुषों की तुलना में बहुत कम भोजन करती हैं, वे पुरुषों की अपेक्षा कम प्रोटीन खाती हैं, और जिसकी वजहसे उनको मासिक चक्र में अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता हैं। महिलाओं को अपने परिवार की देखभाल करते समय खुद के लिए अलग समय निकालना बहुत मुश्किल लगता है।

एक शोध के अनुसार उम्र के साथ महिलाओं की सेहत में बदलाव आता है। 40 वर्ष की आयु में महिलाओं के शरीर में हॉर्मोन असंतुलित होने लगते हैं।अगर आप चाहती हैं की आपका शरीर स्वस्थ और बिमारियों से मुक्त रहे तो इसके लिए आपको नीचे सूचीबद्ध दिशानिर्देशों का पालन करना बेहद लाभकारी साबित होगा।

Ayurvedic Tips for women health

इस लेख में हम महिलाओं के स्वास्थ्य को दुरुस्त रखने के कुछ प्राकृतिक उपायों के बारे में जानकारी प्राप्त करेगें

दिनचर्या में परिवर्तन जरूरी :

आयुर्वेद के अनुसार स्वस्थ रहने और महिला स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए शरीर में वात दोष का संतुलित रहना जरूरी है । शरीर के अंदर वात दोष को एक नियमित दिनचर्या होने से संतुलित रखा जा सकता है जैसे जल्दी जागना और जल्दी सो जाना । नियमित भोजन के समय को शामिल करना और बीच में भोजन न छोड़ना महत्वपूर्ण है। इससे वात दोष नियंत्रित रहता है और मेधा शांत और स्वस्थ बनी रहती है। आयुर्वेद के अनुसार हमेशा ताजा गर्म पका हुआ भोजन सेवन करना लाभदायक होता है ।

स्वच्छ और संतुलित आहार का उपयोग :

आयुर्वेद के अनुसार अच्छे स्वास्थ्य के लिए संतुलित पौष्टिक आहार का होना बहुत जरूरी है। ताजे मौसमी फल और हरी सब्जियां संतुलित आहार सूची में सबसे ऊपर हैं।एक शोध के अनुसार साबुत अनाज, उच्च फाइबर खाद्य पदार्थ, मांस, कम वसा वाले डेयरी उत्पाद का सेवन करना महिलाओं को स्वस्थ और बिमारियों से मुक्त रखने में मददगार साबित होता । इन सभी के अलावा पेय पदार्थ , अत्यधिक नमक और अत्यधिक वसा से दूर रहना बहुत लाभदायक होता है। महिलाओं को मल्टीविटामिन और कैल्शियम से भरपूर भोजन का सेवन करना फायदेमंद होता है ।आयुर्वेदिक चिकित्सा के अनुसार 50 से कम उम्र की महिलाओं को एक दिन में 1000 मिलीग्राम कैल्शियम की जरूरत होती है, जबकि 50 से अधिक उम्र की महिलाओं को एक दिन में 1200 मिलीग्राम कैल्शियम की जरूरत होती है, जो कि देसी गाय के दूध, बादाम और देसी गाय के घी से प्राप्त किया जा सकता है।

तनाव से रहें दूर :

तनाव का स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। यह प्रभाव महिलाओं की बांझपन की समस्या से लेकर अवसाद, चिंता और हृदय रोगों तक हो सकते हैं। महिलाएं दिन-प्रतिदिन की गतिविधियों से अधिक तनाव से गुजरती हैं। इस लिए एक बार आराम करना बहुत महत्वपूर्ण होता है। एक महिला के लिए अपने शौक को आगे बढ़ाने या कुछ ऐसा करना बहुत ज़रूरी है जिससे उसे आनंद मिले। तनाव से मुक्त रहने के लिए ध्यान लगाना , मालिश करना और योग का अभ्यास करने जैसी तकनीकों का पालन किया जा सकता है। महिलाओं को अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए पर्याप्त नींद लेना बहुत जरूरी है। हर समय खुश रहने की कोशिश करें ऐसा करने से यह आपको समय से पहले बूढ़ा होने से बचाएगा क्योंकि यह शरीर में तनाव हॉर्मोन ,कोर्टिसोल के स्तर को कम करता है। एक शोध के अनुसार जोर से हंसने से एंडोर्फिन निकलता है जो रक्त परिसंचरण को तेज कर देता है और शरीर को आराम प्रदान करने में सहायक होता है ।

Stress Management

बुरी आदतों से दूर रहें :

आयुर्वेदिक चिकित्सा के अनुसार ड्रग्स, धूम्रपान, शराब महिलाओं के स्वास्थ्य को बहुत ज्यादा प्रभावित करते हैं। कम मात्रा में शराब का सेवन उचित है लेकिन अधिक मात्रा में शराब का उपयोग करना महिला स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। कैफीन का सेवन हानिकारक होता है ।यह महिलाओं की प्रजनन क्षमता को प्रभावित करती है

रक्तहीनता :

एक शोध के अनुसार समान आयु वर्ग के पुरुषों की तुलना में महिलाओं में एनीमिया यानि रक्तहीनता अधिक आम समस्या है। यह शरीर में लोहे की कमी के कारण होती है। रक्तहीनता होने से महिलाओं में कई समस्याएं हो जाती हैं जैसे बालों का झड़ना, थकावट, सहनशक्ति की कमी और भी अनेक समस्याएं ।महिलाओं को अपने आहार में लोहे से भरपूर नट्स, सेब, चुकंदर, पालक, आंवला और अन्य खाद्य पदार्थों को शामिल करना बहुत महत्वपूर्ण साबित होता है। लोहे के अवशोषण को बढ़ाने का सबसे अच्छा तरीका है नींबू के रस के साथ एक सेब का सेवन

ब्रेस्ट कैंसर को स्वतः कैसे चेक करें :

आयुर्वेद के अनुसार महिलाओं को अपने स्तनों में किसी भी बदलाव को दिखने पर उन पर ध्यान देना चाहिए और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लें।एक शोध के अनुसार 40 से ऊपर की महिलाओं के लिए एक वार्षिक मैमोग्राम जाँच से पता लगाया जा सकता है क्योंकि यह स्तन कैंसर का पता लगाने का एक प्रभावी तरीका माना जाता है।

आयुर्वेद के अनुसार हर 3 साल में पैप टेस्ट करवाना जरूरी :

अगर महिला को सर्वाइकल कैंसर के बारे में जानना है तो उसकी जांच के लिए 21 साल से अधिक उम्र की महिलाओं को हर 3 साल में पैप टेस्ट करवाना चाहिए। यौन रूप से प्रभावित लोगों को क्लैमाइडिया, गोनोरिया, सिफलिस, एचआईवी जैसे एसटीडीज के लिए वार्षिक परीक्षण करवाना जरूरी होता है। स्वस्थ रहने के लिए एक वार्षिक शारीरिक जांच जरूरी है।

महिलाओं के स्वास्थ्य को बढ़ाने के लिए प्राकृतिक जड़ी बूटियां :

आयुर्वेद के अनुसार कुछ जड़ी-बूटियों का अगर रोजाना सेवन किया जाए हैं तो वे महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार करने में मददगार होती है। ऐसी ही एक जड़ी बूटी है शतावरी। यह महिला प्रजनन प्रणाली को मजबूत करता है और हार्मोनल असंतुलन को भी नियंत्रित करता है।आयुर्वेद के अनुसार महिलाओं में कमजोरी को दूर करने के लिए यह जड़ी बूटी बहुत प्रभावी मानी जाती है।

आयुर्वेद के अनुसार महिलाओं के लिए अत्यधिक फायदेमंद अन्य जड़ी-बूटियाँ हैं

अमलाकी / आंवला और अशोक

आंवला शरीर के अंदर तीनों दोषों को संतुलित करने और पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में सहायक साबित होता है।

ध्यान देने योग्य बात :

महिलाओं को अपने भोजन में वसा की मात्रा को संतुलित रखना बहुत जरूरी होता है क्योंकि यह होर्मोनेस को असंतुलित कर देती है है जो बाद में स्त्रीरोग संबंधी अनेक समस्याओं का कारण बन सकता है।

Numerous Benefits and Medicinal Properties of Buttermilk(छाछ के अनगिनत लाभ और औषधीय गुण)

आयुर्वेद के अनुसार

आयुर्वेद के अनुसार अगर गर्मियों में छाछ का सेवन नियमित रूप से किया जाए तो यह अमृत के समान औषधि माना जाता है। यह अनेक पोषक तत्व और खनिज पदार्थों से भरपूर होता है जो आपके शरीर को बिमारियों से बचाए रखने में मददगार साबित होते है ।छाछ का उपयोग प्राचीन काल से ही शरीर को ठंडा रखने के लिए और बिमारियों की रोकथाम के लिए होता रहा है ।कुछ लोग छाछ को लस्सी समझते हैं परन्तु यह लस्सी से बिल्कुल अलग है ।

छाछ का परिचय :

आयुर्वेदिक चिकित्सा के अनुसार छाछ बहुत ही ज्यादा हल्का और तरल पेय पदार्थ होता है इसको बनाने के लिए दही को अच्छी तरह से मथा जाता है ।आयुर्वेद के अनुसार छाछ के अंदर दूध से कम वसा पाई जाती है।आयुर्वेद में छाछ को मठ्ठा के नाम से जाना जाता है ।छाछ के अंदर पोटैशियम,कैल्शियम,मैग्नीशियम और फास्फोरस जैसे महत्वपूर्ण खनिज पदार्थों क अलावा विटामिन सी और प्रोटीन की भरपूर मात्रा पाई जाती है जो आपके शरीर को बिमारियों से बचाए रखने के अलावा उनसे लड़ने की क्षमता को बढ़ाने में भी सहायक होती है । इस लेख में हम छाछ के बिमारियों की रोकथाम करने वाले गुणों के बारे में जानकारी प्राप्त करेगेंजानते हैं छाछ के लाभकारी फायदे :

Benefits of Buttermilk

1.उच्चरक्तचाप को कम करे :

आयुर्वेदिक चिकित्सा के अनुसार अगर किसी व्यक्ति का रक्तचाप बढ़ जाता है तो उसको नियमित रूप से छाछ का सेवन करना फायदेमंद होता है ।एक शोध के अनुसार इसके अंदर एंटी बैक्टीरियल गुण पाया जाता है जो आपके रक्त में हानिकारक बैक्टीरिया को खत्म कर रक्त को संतुलित रखने में सहायक साबित होता है ।इस प्रयोग का रोजाना सेवन शरीर में रक्तचाप को संतुलित रखने के अलावा हृदय रोगों से बचाए रखने में मददगार माना जाता है ।

2. अल्सर को दूर करे :

एक शोध के अनुसार अगर किसी व्यक्ति को पेट से संबंधित बीमारियां जैसे पेट दर्द ,कब्ज ,गैस और अल्सर हो जाती हैं तो उसको रोजाना छाछ का सेवन करना लाभकारी होता है ।इसकी तासीर शीतल होती है जो आपके पेट को शांत रखने के साथ -साथ भोजन को पचाने में सहायक साबित होती है ।छाछ पेट के अंदर जमा अतिरिक्त एसिड को मूत्राशय के रास्ते बाहर निकाल देती है ।

3. त्वचा के लिए फायदेमंद :

गलत खान पान और खराब दिनचर्या की वजह से लोग बहुत जल्दी त्वचा रोगों से ग्रसित हो जाते हैं ।ऐसा इस लिए होता हैं क्योकि हानिकारक बैक्टीरिया शरीर के अंदर जमा हो जाते है जो त्वचा को सबसे ज्यादा प्रभावित करते है ।एक शोध के अनुसार छाछ का रोजाना सेवन शरीर के अंदर से हानिकारक पदार्थों को बाहर निकालने में मददगार साबित होता है ।नियमित रूप से छाछ का सेवन त्वचा को स्वस्थ और बिमारियों से सुरक्षित रखता है ।

4. कोलेस्ट्रॉल को रखे संतुलित :

आयुर्वेदिक चिकित्सा के अनुसार गर्मी के दिनों में छाछ का सेवन बहुत ज्यादा फायदेमंद होता है ।अगर किसी व्यक्ति का कोलेस्ट्रॉल बढ़ गया है तो उसको कम करने में छाछ का सेवन करना असरदार साबित होता है ।आयुर्वेद के अनुसार रोजाना छाछ का सेवन शरीर के अंदर कोलेस्ट्रॉल को संतुलित रखता है । शरीर को स्वस्थ रखने के लिए इस अमृत के समान पेय पदार्थ का सेवन अवश्य करना चाहिए ।

5. कब्ज को दूर करे :

आज के समाज में लोग जंक फ़ूड और तला हुआ खाना बहुत ज्यादा पसंद करते हैं जिसकी वजह से उनकी पाचन शक्ति बहुत जल्दी खराब हो जाती है और वह कब्ज की समस्या से ग्रसित हो जाते हैं ।आयुर्वेदिक चिकित्सा के अनुसार छाछ का सेवन आपकी पाचन क्रिया को दुरुस्त बनाए रखने में सहायक साबित होता है ।रोजाना छाछ का सेवन आपको कब्ज की बीमारी से सुरक्षित रखता है ।इस लिए कब्ज की समस्या से परेशान व्यक्ति को नियमित रूप से १ गिलास छाछ का सेवन करना चाहिए ।

Amazing Health Benefits of Butter Milk

6. वजन को कम करे :

एक शोध के अनुसार छाछ के अंदर फैट और कैलोरी नहीं पाई जाती जिसकी वजह से यह शरीर की अत्यधिक चर्बी को कम करने में सहायक साबित होता है ।इसके अंदर पाए जाने वाले कैल्शियम ,मैग्नीशियम और पोटैशियम जैसे महत्वपूर्ण खनिज पदार्थ आपके शरीर में पानी की कमी नहीं होने देते और ऊर्जा प्रदान करने में मददगार साबित होते हैं । रोजाना मठ्ठे का सेवन भूख को बढ़ने नहीं देता जिससे आपका वजन संतुलित बना रहता है ।

7. बवासीर को खत्म करे :

अगर कोई व्यक्ति बवासीर की बीमारी से ग्रसित है तो उसको छाछ का इस्तेमाल करना लाभकारी होता है ।यह शरीर को ठंडा रखने में सहायक साबित होती है ।आयुर्वेद के अनुसार रोजाना १ गिलास छाछ का सेवन आपकी पाचन क्रिया को मजबूत बनाये रखता है जिससे आप बवासीर जैसी बिमारियों से बचे रहते हैं ।इसके अलावा आधा गिलास छाछ के साथ केला खाने से भी बवासीर की बीमारी को बहुत जल्दी दूर किया जा सकता है।

8. तनाव को दूर करे :

दफ्तर में बहुत ज्यादा कार्य होने की वजह से अनेक लोग तनाव में रहने लग जाते हैं जो आगे चलकर उनके लिए हानिकारक साबित हो सकता है ।इस समस्या को दूर करने के लिए छाछ का रोजाना सेवन फायदेमंद होता है ।आयुर्वेद के अनुसार यह शरीर को ठंडा रखने के साथ साथ मस्तिष्क को शांत एवं विकारों से बचाए रखने में सहायक साबित होता है ।

9. बालों को झड़ने से बचाए :

आयुर्वेदिक चिकित्सा के अनुसार अगर किसी व्यक्ति के बाल समय से पहले झड़ने लग गए हैं तो उसको छाछ का इस्तेमाल करना लाभदायक होता है ।आज के समाज में खराब दिनचर्या की वजह से लोगों के बाल समय से पहले झड़ना शुरू हो जाते हैं ।इस गंभीर समस्या को दूर करने के लिए आपको २ से ३ दिन पुरानी छाछ के साथ सप्ताह में २ से ३ बार बालों को धोना लाभकारी होता है ।यह प्रयोग बालों को मजबूत बनाने के अलावा घना और मुलायम बनाने में सहायक होता है ।

10. प्राकृतिक सौंदर्य बनाए रखने में सहायक :

अगर किसी के चेहरे पर दाद ,झुर्रियां या फिर फुंसियां हो गयी हैं तो उसको गेहूं के आटे में छाछ का मिश्रण करके इस लेप को चेहरे के ऊपर रोजाना लगाने से चेहरा प्राकृतिक सौंदर्य से खिल उठता है इससे अलग अगर आप गुलाब के फूल की जड़ को छाछ के साथ अच्छे से पीसकर चेहरे के ऊपर नियमित रूप से लगाते हैं तो चेहरे की छाइयाँ,झुर्रियां और फुंसियां खत्म हो जाती है । यह प्रयोग प्राकृतिक सौंदर्य प्रदान करने में सहायक साबित होता है ।